2nd open letter to PM- Hindi

प्रधान मंत्री के नाम खुला पत्र

मातृ-सदन, कनखाल,

जिला हरिद्वार, उत्तरखण्ड

13 जून 2018

प्रिय छोटे भाई नरेन्द्र मोदी,

माँ गंगा जी की दुर्दशा को तुम्हारी बहुस्तरीय सरकार और सरकारी मण्डलियों (जैसे नमामि गंगे ) द्वारा पूर्ण अवहेलना ही नहीं, जानते बूझते इरादतन किये जा रहे माँ गंगा जी और पूरे पर्यावरण-निःसर्ग-प्रकृति को पहुँचाये जा रहे अहित के विषय को लेकर, मैं ने तुम्हें एक खुला पत्र 24 फरवरी 2018 को उत्तरकाशी से लिखा था जिसे श्रीनगर गढ़वाल पोस्ट आफिॅस से स्पीडपोस्ट किया गया था । पत्र की प्रति, जिस पर स्पीड पोस्ट कराने की रसीद की प्रतिकृति भी है, तुम्हें याद दिलाने और प्रमाण-हेतु साथ लगा रहा हूँ।

 

जैसे मुझे पहले ही जानना चाहिये था, साढ़े तीन महीने के 106 दिन में, न कोई प्राप्ति सूचना न कोई जवाब या प्रतिक्रिया या माँ गंगा जी या पर्यावरण के हित में (जिससे गंगाजी या निःसर्ग का कोई वास्तविक हित हुआ हो) कोई छोटा सा भी कार्य। तुम्हें क्या फुर्सत माँ गंगा की दुर्दशा या मुझ जैसे बूढ़ों की व्यथा की ओर देखने की ???

 

ठीक है भाई मैं क्यों व्यथा झेलता रहूँ । मैं भी तुम्हें कोसते हुए और प्रभु राम जी से तुम्हें माँ गंगा जी की अवहेलना-पूर्ण-दुर्दशा और अपने बड़े भाई की हत्या के लिये पर्याप्त दण्ड देने की प्रार्थना करता हूँ, शुक्रवार 22 जून 2018 (गंगावतरण – दिवस) से निरंतर उपवास करता हुआ प्राण त्याग देने के निश्चय का पालन करूंगा । आशा तो नहीं है कि तुम्हारे पास ध्यान देने का समय होगा, पर यदि राम जी के प्रताप से, माँ गंगा जी की सुध लेने का मन बने तो माँ के स्वास्थ्य के हित में निम्न कार्य तुरन्त आवश्यक है:

  1. गंगा जी के लिये गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराना (इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में मैं, एडवोकेट एम. सी. मेहता और डा. परितोष त्यागी शामिल थे ), ऐसा न हो सकने पर उस ड्राफ्ट के अध्याय – 1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरन्त लागू और प्रभावी करना ।
  2. उपरोक्त के अन्तर्गत अलकनन्दा, धौलीगंगा, नन्दाकिनी, पिण्डर तथा मन्दाकिनी पर सभी निर्माणाधीन/प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना तुरन्त निरस्त करना ।
  3. उपरोक्त ड्राफ्ट अधिनियम की धारा 4 (D) वन कटान तथा 4(F) खनन, 4 (G) किसी भी प्रकार की खुदान पर पूर्ण रोक तुरन्त लागू कराना, विशेषतया हरिद्वार कुँभ क्षेत्र में ।
  4. मेरे 24 फरवरी के पत्र की अपेक्षा – ग में वर्णित गंगा-भक्त परिषद का Provisional गठन, (जून 2019 तक के लिये) तुम्हारे द्वारा नामांकित 20 सदस्यों का जो गंगा जी और केवल गंगा जी के हित में काम करने की शपथ गंगा जी में खड़े होकर लें और गंगा से जुड़े सभी विषयों पर इसका मत निर्णायक माना जाये (तुम स्वयं तो यह शपथ ले नहीं पाओगे शायद । क्योंकि तुम संविधान से जुड़े हो )

प्रभु तुम्हें सदबुद्धि दें और अपने अच्छे बुरे सभी कामों का फल भी । माँ गंगा जी की अवहेलना, उन्हें धोखा देने को किसी स्थिति में माफ न करें….

तुम्हारा माँ-गंगा-भक्त

बड़ा भाई

(ज्ञान स्वरूप सानंद)

संन्यास पूर्व नाम – गुरूदास अग्रवाल (पूर्व प्रोफेसर, आई. आई. टी. कानपुर)

सदस्य-सचिव, केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड, नई दिल्ली




One Comment

  • Prime Minister Modi visited Varanasi to celebrate his 68th birthday on 17th and 18th of September’18. He had time to inaugurate projects of about five thousands crores and spek to the children as also spend about more than half an hour watching a film made on himself. And Prof. G D Aggerwal was on his 88th day of fast and within which he had sent two letters dated 24th feb’18 and 13 June’18 to which Prime minister had no thought it worth to reply nor the time he could manage to meet Prof. Aggerwal and to assure him of all that he can do as also to break his fast unto death. Modi knows and is confident that death of one such environmentalist cannot and will not make him lose elections in 2019 and that is what matters for him. He is neither son of Ganga nor the messiha of poor he is as selfish and untrustworthy a politician possibly people have not seen yet.

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